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उदासीन दिखता है मकड़ी की जाल के समान संसार संसार को आवाह्न किया बजता दुर्गा जी के भजन डंका प्रेम यादें शान बढ़ाकर अभी भी लेकिन अब हकीकत में मुमकिन नही... सुबह वाली चाय तोह मैं बन ही जाऊँगा इन दिखावे वालें अपनों से... वीरों के कठिन परिश्रम बुढ़िया के गहने सूरज लेकिन तू चाय के साथ वाली नमकिन नही... हो सके तोह दूर ही रहना में श्री देवी भजन माता रानी का भजन

Hindi गुरूदेव के श्रीचरणों में Audios