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माता रानी का भजन बजता अख़बार सूरज कठिन परिश्रम यादें किसी की नजरों में प्रेम डंका लेकिन तू चाय के साथ वाली नमकिन नही... हो सके तोह दूर ही रहना मकड़ी की जाल के समान संसार लेकिन अब हकीकत में मुमकिन नही... सुबह वाली चाय तोह मैं बन ही जाऊँगा वीरों के शान बढ़ाकर इन दिखावे वालें अपनों से... अभी भी अंबर में इस ख्वाबो वाली सपनों से... हमेशा जरा बचके ही रहना पगली संसार को आवाह्न किया दुर्गा जी के भजन

Hindi गुरूदेव के श्रीचरणों में Audios